भिया की लाल बत्ती :

 

 

भिया की लाल बत्ती :



भिया की गाड़ी की लालचट बत्ती नि थी “सुहाग” की निशाणी थी गाड़ी की “मांग को सिंदूर” थो जो बिना सिंदूर के विधवा सरीकी की लागे है  | कितरा बरस वय गया इनी सुहाग की निशाणी के माथा पे धारण करते हुवे और अबे तम को के इकी जरूरत नि है  कई बात करो | सुहाग के रेते कोई विधवा को वेश धारण करे कितरो मुश्किल काम है  | या तो सुहाग के पेला निपटाओ नि तो तलाक तो करवावो कई तो करो | गाड़ी में भलई से डीजल के जगे घासलेट भरो, भलई से मेन्टेनेन्स का  नाम पे करोड़ो खाई जावो पर इकी सुहाग की निशाणी के तो मत छेड़ो | बत्ती नि या वा शक्ति थी जो नेताजी के सती की तरह से यमराज से भी बचाई के लय आती थी | पुलिस हो को के गुंडा , नेता हो के अभिनेता ,वकील हो के जज सब के यो गुरु मन्त्र मिलियो हुवो है  के जा भी लाल बत्ती दिखे वा  झट से काम की गति हजार गुना करी के पुरो करो नि तो सजा सारु तैयार रो की तमने लाल बत्ती वाला को काम नि कार्यो | अबे कई भिया सबके बोलता फिरेगा के हु “फलानो हु” या गाड़ी पे लिखेगा के “भूतपूर्व लाल बत्ती वाली गाड़ी” | अब भिया के टोल नाका पे भी अपनों कार्ड बतानो पड़ेगा कुन पिचाने बापड़ा के | जिनी तरह से महाभारत में अर्जुन का रथ पे धरम ध्वजा में हनुमान जी विराज मान  था और पुरी देवीय शक्ति उकी मदद करी री थी उनिज तरह से लाल बत्ती वाला का साथे पुरो हिंदुस्तान को तंत्र लाग्यो रेवे | लाल बत्ती की गाड़ी को मतलब होवे के वि भिया ख़ास म ख़ास है  देश का सारु | वि घनेकमान है  और उनके सबसे पेला रास्तो मिलनों चिये वि जा जय रिया है  वा उन्दा पड़ी जावेगा और सगळी जिम्मेदारी को टो लो अपना माथा पे मेली लेगा | अबे वि भिया अपनी मेम साब और आखा कुटुंब के गाड़ी में सेर करावे तो कोई कई नि बोले तो इमे वि बिचारा कई करे | पत्नी भी तो देश की बेटी हे और सरकार खुद की री ही बेटी बढाओ नारी को सम्मान दो तो बिना गाड़ी के कसो सम्मान | अभी तक भिया लाल बत्ती का नाम पे कना कतरा के बत्ती देता आया अबे उनकी बत्ती उतरेगी तो तकलीफ तो होगी नि |
अबे सब से बड़ी समस्या तो या आवेगी के सेर तो ठीक है  गाव देहात में साब जावेगा तो को कोई उनके कोडी का भाव नि पूछेगा और केगा के ई केसा भिया इनकी गाड़ी में लाल बत्ती तो है  ज नि | दुसरो अबे वि कई से भी निकले गा तो  हवालदार साब भी सालुट मारने वाला नि है  केगा के अरे साब आपकी गाड़ी थी हु तो सम्ज्यो मुन्ना टपोरी की थी दोय एक जेसी ज लागे और एक जैसा ज हूटर वाला हॉर्न दोय गाडी में  | अब खुद भिया कॉच खोली खोली के सबके राम राम करता हुवा निकलेगा | सबसे जादा तकलीफ तो भिया का सारथी (ड्राइवर ) के होगी अभी तक तो चाय से जादा तो तपेली गरम रेती थी | भिया से जादा तो ड्राईवर की दादागिरी होती थी जा मर्जी गाड़ी खड़ी करो ,लाल लाइट में निकल जावो ,चाहे जिसको ठोको , कोई कई नि केगा,खाली टेम में अपना भी परिवार घुमावो और साब  का परिवार घुमावो अब सब बंद होवा की नोबट आने वाली है  |

तो भिया की तरफ से सरकार से विनम्र निवेदन हे की उनकी लालबत्ती के यथा स्थिति प्रदान करे ताकि वी  देश की धड़कन बनि के जनता की छाती पर मुंग दली  सके और ऊनि मुंग की डाल की खिचडी खिलाई के अपना परिवार को पालन पोषण करी सके |

राजेश भंडारी “बाबु “

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