भिया की लाल बत्ती :
भिया की लाल बत्ती : भिया की गाड़ी की लालचट बत्ती नि थी “सुहाग” की निशाणी थी गाड़ी की “मांग को सिंदूर” थो जो बिना सिंदूर के विधवा सरीकी की लागे है | कितरा बरस वय गया इनी सुहाग की निशाणी के माथा पे धारण करते हुवे और अबे तम को के इकी जरूरत नि है कई बात करो | सुहाग के रेते कोई विधवा को वेश धारण करे कितरो मुश्किल काम है | या तो सुहाग के पेला निपटाओ नि तो तलाक तो करवावो कई तो करो | गाड़ी में भलई से डीजल के जगे घासलेट भरो, भलई से मेन्टेनेन्स का नाम पे करोड़ो खाई जावो पर इकी सुहाग की निशाणी के तो मत छेड़ो | बत्ती नि या वा शक्ति थी जो नेताजी के सती की तरह से यमराज से भी बचाई के लय आती थी | पुलिस हो को के गुंडा , नेता हो के अभिनेता ,वकील हो के जज सब के यो गुरु मन्त्र मिलियो हुवो है के जा भी लाल बत्ती दिखे वा झट से काम की गति हजार गुना करी के पुरो करो नि तो सजा सारु तैयार रो की तमने लाल बत्ती वाला को काम नि कार्यो | अबे कई भिया सबके बोलता फिरेगा के हु “फलानो हु” या गाड़ी पे लिखेगा के “भूतपूर्व लाल बत्ती वाली गाड़ी” | अब भिया के टोल नाका पे भी...